बिहार की स्वर कोकिला ‘शारदा सिन्हा’ नहीं रहीं | SHARDA SINHA |
बिहार की स्वर कोकिला (प्रसिद्ध लोक गायिका) थी शारदा सिन्हा, जिनके गाने के बिना छठ पर्व अधूरा है। बिहार की शारदा सिन्हा नहीं रहीं, उनकी हालत खराब थी, निधन पर भावुक हुए बेटे अंशुमान ने बताया कि वे वेंटिलेटर पर थी, मां को छठी मईया ने अपने पास बुला लिया।
शारदा सिन्हा (72 साल) की तबीयत अचानक खराब हो गई और 4 नवंबर को वेंटिलेटर पर भर्ती हो गईं। शारदा सिन्हा के पति बृज किशोर सिन्हा का भी हाल ही में निधन हो गया था। इसके बाद से वह सदमे में थीं। शारदा सिन्हा करीब सात साल से मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थी। यह ब्लड कैंसर की तरह है। 26 अक्टूबर को, उनकी हालत बिगड़ने पर एम्स के कैंसर सेंटर में भर्ती किया गया। बाद में उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना था। बाद में प्राइवेट वार्ड में स्थानांतरित किया गया।
शिक्षा और प्रशिक्षण
शारदा सिन्हा ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से संगीत में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उन्हें इस आधुनिक डिग्री ने संगीत के सिद्धांत, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व की खोज करने का मौका दिया। शारदा ने प्रयाग संगीत समिति और मगध महिला कॉलेज से भी प्रशिक्षण लिया था। शारदा सिन्हा को 1991 में पद्मश्री और 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाना हाल-चाल
सुबह उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। उसने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बातचीत की थी और उनकी मां का हाल-चाल जाना था। उसने मां को भी बताया। वेंटिलेटर में भर्ती मां शारदा सिन्हा ने चावल के दाने के बराबर आंख की पुतली हिलाकर अपनी सहमति दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंशुमान और एम्स के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास से भी फोन किया और उन्हें शारदा सिन्हा की अच्छी देखभाल करने का आदेश दिया।
शारदा सिन्हा सदमे में थीं।
4 नवंबर को शारदा सिन्हा की तबीयत अचानक खराब हो गई और वेंटिलेटर पर भर्ती हो गईं। शारदा सिन्हा के पति बृज किशोर सिन्हा का भी हाल ही में निधन हो गया था। इसके बाद से वह सदमे में थीं। बेटे अंशुमान ने भी उनके निधन पर बयान दिया है। उन्होंने कहा, आप सब की प्रार्थना और प्यार हमेशा मां के साथ रहेंगे। मां को छठी मईया ने अपने पास बुला लिया है। मां अब शारीरिक रूप में हम सब के बीच नहीं रहीं।
शारदा सिन्हा ने अंतिम सांस ली।
पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा का छठ पर्व की पहली रात निधन हो गया। 9.20 बजे रात को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। AIMS ने बताया कि शारदा सिन्हा मंगलवार रात 9.20 बजे रिफ्रैक्टरी शॉक से उनका निधन हो गया। यह एक स्थिति है जिसमें पर्याप्त उपचार के बावजूद आघात जारी रहता है।
शारदा सिन्हा का योगदान
शारदा सिन्हा बिहार एक लोकप्रिय गायिका हैं, जिन्हें मैथिली और भोजपुरी संगीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें अक्सर इस क्षेत्र का सांस्कृतिक दूत बताया जाता है। सिन्हा छठ पूजा के दौरान नियमित रूप से प्रस्तुति देती हैं और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के बिहार दौरे पर भी मंच की शोभा बढ़ाई। वह अपने गायन करियर के अलावा कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल रही हैं. उनके संगीत योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं, जिसमें बिहार सरकार से सम्मान भी शामिल है।
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FAQs:
Ans: Sharda Sinha is renowned Indian folk singer who is best known for her contributions to Maithili and Bhojpuri folk music. She was born in Bihar, India, on October 1, 1952, and has been involved in the music business since the 1970s.
Ans: “Taar Bijli” (Gangs Of Wasseypur 2)
“Kahe Toh Se Sajna” (Maine Pyaar Kiya)
“Babul” (Hum Aapke Hain Koun)
Ans: Padma Shri (2018): Awarded India’s fourth-highest civilian honor for her contributions to folk music.
Sangeet Natak Akademi Award (2017): Recognized for her outstanding work in folk music.
Bihar Ratna (2015): Honored by the Bihar government for her cultural contributions.
National Film Award (1995): Best Female Playback Singer for the film “Godhuli.”
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